इस बाढ मेँ बचा न कोई मुहम्मद

……….. इस बाढ मेँ बचा न कोई मुहम्मद …….।

पानी बरसा बाढ आयी बह गये सारे मुल्ले।
न अल्ला बचा न मुल्ला बचा,
बचा न कोई मुहम्मद।
कह गयेँ ये कट्टर हिँदू कब्र बचा न बची कोई मजार।
अब किसमेँ हम धर्मनिर्पेक्ष लोग रगडे नाक अपनी क्योँकी इस बाढ मेँ बचा न कोई मुहम्मद,
बचा न कोई मुहम्मद ।
रह गये ख्वाब अधूरे क्योँकी बचा न कोई मुहम्मद ।

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