पाक नापाक

क्यूँ अँगार उठाए जाते हो, फुँकार लगाए जाते हो
जब सबल नहीं व्यक्तित्व तुम्हारा, क्यूँ तलवार उठाए जाते हो

अस्तित्व तेरा हम पर निर्भर, दशा तेरी रही बिखर-2,
तू पानी का प्यासा है, और तू करे विजय की आशा है,
तेरा कोई अब मान नहीं, बिल्कुल तुझमें अब जान नहीं,
क्यूँ तुम व्यर्थ ही बिफरे जाते हो, खाली जिह्वा चलाते हो

क्यूँ अँगार उठाए जाते हो, फुँकार लगाए जाते हो
जब सबल नहीं व्यक्तित्व तुम्हारा, क्यूँ तलवार उठाए जाते हो

तुम नंगे पैरों चलने वालों, चप्पल भी हमने दी थी,
सदा से मुँह की खाने वालों, इज्जत भी हमने दी थी
अदा नहीं उपकार करो तो, चुप रहना ही सीखो तुम
एक दिन इस को काट ही देंगे, बहुत हिलाते हो तुम दुम
तुम्हारी अपनी कोई राह नहीं, प्रगति की कोई चाह नहीं
मंजिल को पाने में अपनी, रोडें बिछाए जाते हो

क्यूँ अँगार उठाए जाते हो, फुँकार लगाए जाते हो
जब सबल नहीं व्यक्तित्व तुम्हारा, क्यूँ तलवार उठाए जाते हो

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