कसम हिन्दुस्तान की

1-
कसम हिन्दुस्तान की
सिपाही हिन्दुस्तान का हूँ,
पाला हुआ मैं भी
किसी इंसान का हूँ,
फ़कत इतना नहीं शैतां
ईमां कत्ल को कह दूँ,
फर्क रूह का ओ मुलाजिम
भगवान का हूँ।

2-
जिस दम मेरी इन्द्रियां
बहक गईं मँझधार में,
मान लूंगा मैं तुझे,
है दम तेरी कटार में,
तब तक मुझे निगाह से
घूरना ही छोड़ दे,
गा गजल बंदूक से
क्या रखा तलवार में।

3-
टूटा हूँ किस्मत से
मगर नाज काफी है,
अभी तक मेरी कलम में
स्याही बाकी है,
मुझे न दिखा खौफ
बंदूक का जालिम,
जब तक मेरे जीने की
हसरत बाकी है।

4-
तने-रंजूर का
जामिने-राजदां बदला,
मेरे मुसाहिब का
कारवाँ बदला,
बदल जाती है किस्मत
वजन पानी का देखकर,
मेरा तो नसीब
मेरा आसमां बदला।

5-
ऐ जमाने अब
छोड़ दे साथ मेरा,
वर्ना मैं तेरी
दुनियां छोड़ जाऊँगा,
मरकर भी न रोशन
कर पाया तुझे
जलती चिता ये
जिस्म छोड़ जाऊँगा।

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