‘मुकेश’भयो क्यों बाबला

1-॰
‘मुकेश’भयो क्यों बाबला
जाए जगत के संग,
जिनकी उजली चादरें
उनके गुजले रंग।

2-
शक्ल शाह की ओ
कातिल का गिरीबां,
पूछता हूँ जख्म से
बता दर्द कहाँ है?
काटा ‘शालिनी’ को
कुत्ते ने वफ़ादार
इस रोग का साहिबो
अस्पताल कहाँ है?

3-
इन चुनावों में कितने
दरख्त गिरे हैं,
जो न पीते थे कभी
पिए पड़े हैं,
किस-किस को दिखाएँ
उनके घर का रास्ता,
बेशर्म हर मोड़
बेसुध सोए पड़े हैं।

4-
कैसो आयो चुनाव
चुने सब अपनो आपो,
चूकेँ नहीं दाँव पर
माँगें लाखों-लाखों,
बेबस और लाचार की
ना पीड़ा ना सुध,
अपनो बेचो जमीर
पास न धेला राखो।

5-
अकेले आए अकेले
चले आओगे,
छूटेगा कफ़न भी
नंगे चले जाओगे,
ये बात अलग है
अर्थी को सजा लो
लौ में चिता की
दिल को तपा लो।

lekhakmukeshsharma@gmail.com/9910198419

2 Comments

  1. अरुण अग्रवाल अरुण जी अग्रवाल 12/09/2014
    • Mukesh Sharma Mukesh Sharma 12/09/2014

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