दम तोड़ती जिन्दगी

1-
दम तोड़ती जिन्दगी
मातमों का दौर था,
किसे खबर सुकून की
मामला कुछ और था,
अपनी-अपनी समेटने में
व्यस्त था जमाना,
हर उजले लिबास में
छुपा कोई चोर था।

2-
उन्माद है या नशा
या तेरा पाखण्ड कहूँ,
पीकर गया है तू बहक
मानव भोले क्या कहूँ,
पत्नी को माता कह सके
जान लूं है नशा तुझे,
तुझको नशा चुनाव का
अब भला मैं क्या कहूँ?

3-
शर्म और हया को
मक्कारी से सींचकर,
फ़रेब और झूठ को
गद्दारी में पीसकर,
जमीर को मारकर
अय्याशी का सपना,
जमाने को कदमों से
जाता है रौंदकर।

4-
कोई इन्द्रिय-तंत्र मेरे
कम्प्यूटर उतार दे,
फिर मानस-तंत्र का
सॉफ्टवेयर वार दे,
जिसमें भरी हों शील की
नित नई हजारों कोशिशें,
नाम संक्रमित एड्स को
देखते ही पछाड़ दे।

5-
ऐ चाँद तू आकाश से
कुछ सितारे भेज दे,
माँग में उनको भरूँ
मेरे चाँद को उपहार दे,
साथ में कुछ शीलता
भेजना न भूलना,
वहशियत के इस समाज को
कर्म का आभास दे।

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