कहानी छोड़ जायेंगे – डी के निवातिया

कहानी छोड़ जायेंगे

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मिटाओगे कहाँ तक मेरी यादें, हर मोड़ पर लफ्जों की वीरानी छोड़ जायेंगे l
कैसे बीतेगी तुम्हारी सुबह-शाम, हम सिसकती रातों की कहानी छोड़ जायेंगे !!

हम बदनाम ही सही तेरी गलियों में कदमो की सहमी निशानी छोड़ जायेगें l
कैसे गुजर सकोगे उन राहो से जिनपे हम रूह को छूती रवानी छोड़ जायेगें ll

भुला न सकोगे यादें वो प्यार की बातें, ऐसी जीवन गाथा छोड़ जायेगें l
तुम संग बितायें हसीन पलों के महकते गुलशन की क्यारी छोड़ जायेंगे ll

तरसोगे एक एक पल को जीने के लिये, ऐसी बदलती रुत छोड़ जायेंगे l
रूह तेरी जाएगी मेरे साथ ही, इस जिस्म की सूनी अटारी छोड़जायेंगे ll

आज करते हो किनारा बेवजह हम से, हम जीने की ऐसी वजह छोड़ जायेंगे l
ख्वाहिशें रोज़ दिल में दंगे करेंगी, रिश्तों में लगी हुक्म-ऐ- मनाही छोड़ जायेंगे ll

बख्शी है जो हमने मुफ्त में, प्यार की दौलत के वो खजाने ढूंढते रह जाओगे l
न मिलेगी बादशाहों के खजाने मे भी,ऐसे प्रेम आलिंगन की खामी छोड़ जायेंगे ll

मिटाओगे कहाँ तक मेरी यादें, हर मोड़ पर लफ्जों की वीरानी छोड़ जायेगें l
कैसे बीतेगी तुम्हारी सुबह-शाम, हम सिसकती रातों की कहानी छोड़ जायेंगे !!
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स्वरचित : – डी के निवातिया

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4 Comments

  1. pratyush jain 17/09/2014
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 17/09/2014
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 26/09/2018
  2. kiran kapur gulati Kiran Kapur Gulati 20/09/2018

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