‘वृद्धा! ढ़ूढ़त ओर छोर’


वृद्धा पुकारे बोली अपनी सुनामी।
रहि-रहि गुजरिया गावे कहानी पुरानी॥
बेवफा प्यार हँसा हँसती रवानी।
जिन्दगी तबाह कइलै वृद्धा दीवानी॥
खुद मन में सजोए हैं अपनी सुनामी।
रहि-रहि गुजरिया गावे कहानी पुरानी॥
दिल पूरा भरा नहीं जीवन की रवानी।
कांहें भूलत नाहीं उनकी जवानी॥
ईश्वर नाहीं याद आवत लुटती जवानी।
कइसन-कइसन इहै हय वृद्धा कहानी॥
कभी फूलल बगिया महके मेहरबानी।
उतरतीं परी मानो महकल जवानी॥
तितली तोतली तिलस्म तोहार दिवानी।
गाँव ठाँव नगर बढ़ल भइल मनमानी॥

Leave a Reply