‘सत्य अजेय’


सत्य सुकृत कहने की हिम्मत,
किसमें उपज हुई है।
आज ब्लोग रिक्त मानो दिखता,
नारी वेदी!पर खड़ी है।
नारी रક્ષા से ક્ષत्रिय का राज,
वह सुरક્ષિत रहता है।
सदा सत्य का सबल संबल,
सद्बुद्धि कल्याणकारी है।
જ્ઞાन आंतरिक कवच ब्रह्म का,
विवेक रક્ષા करता है।
बुद्धि!शक्तिशाली सोम्यगुणदात्री,
सत्य!के प्रचारक विद्वान होते हैं॥

Leave a Reply