सूरज

चलो चलें सूरज की आेर
राह कठिन है बहुत मुश्किल है
अपने मन में भी साहस बल है
बाधा पग पग पर डरा रही है
पर दृढ़ निश्चय और बढ़ा रही है
मोड़ कई है जो भटका सकते हैं
कुछ देर के लिय अटका सकते हैं
ज्ञानी नहीं हैं पर अज्ञान भी नहीं हैं
सही ग़लत का भान नहीं है
बिलंव हो तो घबडा मत जाना
आधी राह से मत वापस आना
जल्द आएगा नया दैार
चलों चलें सूरज की आेर
अंधकार भी हमें खूब ललचाता है
तारों की चमक चाँदनी बरसाता है
जो भटक गया वो भटक गया
वो मुश्किल में अटक गया
जीवन के इस भाग दौड़ में
लालच होगा सब मोड़ में
तुम मत शामिल होना इस होड़ में
मज़ा ले रहे हैं समाज के तोड़ में
राजनीति बन गई इतनी गंदी है
न्याय व्यवस्था भी अब अंधी है
फिर भी मत तोड़ो उम्मीदों की डोर
चलो चलें सूरज की ओर

—-आशुतोष कुमार

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