कविता:- (नारी का जीवन)

जब एक नारी बयाँ करती है
अपना यथार्थ जीवन
दो टूक हो जाता है
कलेजा कवि का,
कलम सिसकने लगती है
निर्झर नयन से बहने लगता है
क्योंकि उसका हरेक लब्ज
डूबा हुआ होता है दर्द में |

जब वह सडक पर चलती है
काम्बुक भेडिए लग जाते हैं
उसके पीछे
और उसे बदचलन करार देते हैं,
जन्म से लेकर जीवन के आखिरी पडाव तक
दर्द में जी रही है नारी |
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कवि रमाकांत यादव
मो.08756146096