पंख खोले उड़ान तो ऊँची भरनी चाहिये

पंख खोले उड़ान तो ऊँची भरनी चाहिये
पर धरा पर नीड़ की भी लाज रखनी चाहिये।

बोल के लब अब आजाद हैं अपने देश में
हर जुबां से हर वक्त गंगा निकलनी चाहिये।

जहर उगलने लगे, सुलगाने आग नफरत की
जब चले ऐसी जुबां तो वह कतरनी चाहिये।

पाक हो मकसद पर कोषिश यह करनी चाहिये
पाक हो जो राह वही राह पकड़नी चाहिये।

कुछ नहीं बस उड़ती चिन्गारियाँ दिखती बहुत हैं
अब तो किसी दीप से रोशनी निकलनी चाहिये।

3 Comments

  1. Priyanshi 08/09/2014
  2. bhupendradave 08/09/2014
  3. kiran kapur gulati kiran kapur gulati 14/09/2016

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