गजल-अगर जो शेर सो जाए तो वो खाना नहीं पाता |

अगर जो शेर सो जाए तो वो खाना नहीं पाता |
परिंदा सुस्त हो जाए तो वो दाना नहीं पाता ||

ह्रदय में चाह रखते जो कि तुम भी वीर कहलाओ |
डरा संग्राम से वो वीर का बाना नहीं पाता ||

लडे जो न्याय की खातिर वो योद्धा श्रेष्ठ कहलाये |
सिपाही सत्य पथ का जो कभी ताना नहीं पाता ||

अगर दीवाना बनना है बुलंदी के बनो भाई |
बुलंदी है नहीं कोई जो दीवाना नहीं पाता ||

खुला जो नेत्र शिव का तीसरा ज्वाला प्रकट होगी |
कभी भी ज्वाल से तो जीत परवाना नहीं पाता ||

आचार्य शिवप्रकाश अवस्थी
9412224548

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