और रावण को जला दिया !

और रावण को जला दिया, और रावण को जला दिया,
सचमुच जलाया है उसको, या फिर उसको भुला दिया।।

व्यक्ति नहीं है रावण कोई, रावण नाम है बुराई का,
सोचो बुराई को तुमने, क्या सचमुच ही जला दिया,
या फिर उसको भुला दिया, और रावण को जला दिया।।

दैत्य नहीं है रावण कोई, रावण कामना है मन की,
जला सको तो इसे जलाओ, या वासना है मन की,
इस भावना ने तो कब किसका कोई भला किया,
सोचो वासना को तुमने, क्या सचमुच ही जला दिया ?
या फिर उसको भुला दिया, और रावण को जला दिया।।

जल गया रावण का पुतला, क्या सचमुच रावण चला गया,
या एक बार फिर दोबारा, आदमी से आदमी छला गया,
मन वाला रावण जला नहीं, पुतले को तुमने जला दिया,
सोचो मन वाले रावण को, क्या सचमुच ही जला दिया ?
या फिर उसको भुला दिया, और रावण को जला दिया।।

रावण नहीं है नाम किसी का, रावण काम है लोक-लजाई का,
चौरी और डकैती जब, जरिया बनते है कमाई का,
तब-तब पैदा होते रावण, क्या इसे मार के सुला दिया ?
या फिर उसको भुला दिया, और रावण को जला दिया।।
रावण को तो मार दिया पर, क्या सत्य रामजी जीत गये,
पर्व दशहरा मनाते हमको, आज युगायुग बीत गये,
सोचो रावण बीता है, या रामजी को बीता दिया,
क्या सचमुच रावण को है जलाया, और क्या रावण को जला दिया।।

दस आनन दशानन के, आज भी विचरते है मन में,
लोभ-लालच-झूठ-मक्कारी, आज छुपी है हर तन में,
बेईमानी-भ्रष्टाचारी-गद्दारी, चोरी और डकैती भी,
माया के फंदों को क्या, सचमुच तुमने जला दिया ?
या फिर उसको भुला दिया, और रावण को जला दिया।।

नाभीकुंड वाला अमृत छिपा हुआ है राजनीति में,
चारों और चढ़ा है रावण, पूरा पगा अनीति में,
दे के समर्थन इन सबको, क्या रावण को नहीं जिला दिया ?
या फिर उसको भुला दिया, और रावण को जला दिया।।

रावण तभी मरेगा, मारो वासना खुड़ मन की,
रावण तभी मरेगा, मारोगे कामना तुम मन की,
रावण उस दिन जल जायेगा, जिस दिन स्वार्थ को जला दिया,
और रावण को जला दिया, और रावण को जला दिया,
सचमुच जला दिया उसको, या फिर उसको भुला दिया।।

मनोज चारण
मो. 9414582964

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