घनाक्षरी छंद

श्रीकृष्ण अवतार लो औ गोपिया सुधार लो , ऊधौ को कोई आज गोपी भरमाने लगी |
बांधा है प्रेम डोर ह्रदय को दिया मरोड़ , प्रेम को छोड़ ज्ञान दर्शन सिखाने लगी ||
श्रीकृष्ण उपदेश से उद्धव बदला न था ,गोपी ने बदला वो बदला चुकाने लगी |
ज्ञान आश्रय को छोड़ उद्धव बना प्रेमी आज , ज्ञान को छुडाया था प्रेम अब छुडाने लगी ||

2 Comments

  1. manoj charan manoj charan 01/09/2014

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