सोच-सोच घबराता हूँ

ये सोच-सोच घबराता हूँ……..

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पिता नही मेरी ताकत है, छत्र-छाया में उनकी रहता हूँ
महफूज उनके संरक्षण में, निडर हो बेफिक्री से जीता हूँ
छोड़ जायेंगे एक दिन अकेला,ख्याल से सहम जाता हूँ
टल न सकेगी वक़्त कि अनहोनी, ये सोच-सोच घबराता हूँ……..!!

करुणा सागर, अथाह प्रेम, साश्वत देवी देख पाता हूँ
सर्वस्व लुटां दू चरणो में, फिर भी न क़र्ज़ चुका पाता हूँ
आँचल का साया बना रहे माँ, आजीवन छाया चाहता हूँ
किस क्षण रह जाऊंगा बिलखता,ये सोच-सोच घबराता हूँ……!!

प्राणप्रिय, जीवन संगनी, सुख-दुःख की सहभागिनी
प्रेरणा की स्रोत बनकर, मेरे जीवन की पतवार बनी
तुझ संग मिलकर जीवन रथ को पार लगाता जाता हूँ
टूट जायेगा बंधन जन्मो का, ये सोच-सोच घबराता हूँ……..!!

नव-पल्लव, मेरे जिगर के टुकड़े, जिन्हे देख मुस्काता हूँ
किलकारियों से जिनकी, घर-आँगन को चहकता पाता हूँ
उन खातिर बनकर माली,खून-पसीने से सींचता जाता हूँ
बिन माली के क्या होगा उनका, ये सोच-सोच घबराता हूँ……..!!

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__________डी. के. निवातिया ________

10 Comments

  1. Rinki Raut Rinki Raut 05/08/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 20/09/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 20/09/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 06/08/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 20/09/2018
  3. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 06/08/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 20/09/2018
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 06/08/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 20/09/2018

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