मजमूं मक्तूब में कहाँ

मजमूं मकतूब में कहाँ.
दिल में दफन है यारब,
इसके सिवा भी शहर में.
कई फन हैं यारब।

हकीकत कब्रिस्तान में ही
दफन नहीं होती,
फितराक में और भी
मदफ़न हैं यारब।

इरादा उनका भी नहीं.
गिरीबां कत्ल हो उनका,
मगर ये मसला ही कुछ
इरादतन है यारब।

गोया फिक्र ही किसको.
कब निकले ज़नाज़ा मेरा,
कब से सामने रखा कोई.
कफ़न है यारब?

करोड़ों बनाव हैं.
हमसा न कोई बनाव,
दर्से-बेखुदी या तेरी
ज़िन्दाँन है यारब।

कर दफन मुझको
न आँसू आँख से निकले,
छोड़कर इतबार और भी
कई दिन हैं यारब।

1-मकतूब/पत्र
2-फितराक/थैला
3-मदफ़न/कब्र
4-दर्से-बेखुदी/उन्मादित द्रश्य,
5-ज़िन्दाँन/कारागार

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