बचपन

अजीब सा अब उसका बचपन हो गया है
गली मेँ खेलने उतरा बच्चा माल मेँ खो गया है
जहाँ लेनी थी साँस वहाँ पार्किंग हो गया है
फुटबाल उदास कोने मेँ दुबक के रह गया है
पिज्जा ना खाने पर बच्चा रो सा गया है
रँगीन पत्थरोँ पर चलता सा हो गया है
गेम जोन मेँ बचपन उसका शोर सा हो गया है
कँचे की वो टनाक सी आवाज वो भूल सा गया है

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