चले वो कारवाँ लेकर

चले वो कारवाँ लेकर.
कदम हमने बढ़ाए थे,
उन्हीं की ली कसम हमने.
उन्हीं पर जाँ लुटाए थे।

बदलकर हम इरादा आ गए.
कल उनकी महफिल में,
तकाज़ा वक्त का देखो.
हुए अपने पराए थे।

उतारो आँख में आँसू.
ये पत्थर क्या बिगाड़ेंगे,
इन्हीं से खेलने वाले.
कहाँ कब मुस्कुराए थे?

इरादा जो नहीं रखते.
सजा देते हैं पलकों को,
हमारे हाल को देखो कि.
बनकर दुल्हन आए थे।

अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा.
सजा लो अपनी महफिल को,
दिखाकर चाँद को तुमने.
सितारे जगमगाए थे।

हटा दो आँख से लावा.
जुबां से मुस्कुराओगे,
डरे से अब तुम्हीँ लगते.
तुम्हीँ ने हम डराए थे।

उठाकर आपने पत्थर.
हमारे सिर पे दे मारा,
हमने कुछ कहा तुमसे.
कहाँ फिर तुम पराए थे?

तराशो तुम अगर पत्थर.
तो मंदिर हम बना देवें,
पकड़कर आपने गर्दन कि.
मुर्गा हम बनाए थे।

किसी का कोई नहीं साथी.
ये दुनिया अपने रंगों में,
खिलाई इस कदर होली.
खूं में हम नहाए थे।

करे गर जुर्म औरत पर.
तो ये जान ले नादां,
खुदा भी सुन नहीं सकता.
हकीकत हम सुनाए थे।

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