माँ दिलावो वो प्यारी-सी गोदी तुम्हारी

माँ दिलावो वो प्यारी-सी गोदी तुम्हारी

माँ दिलावो वो प्यारी-सी गोदी तुम्हारी
जिसमें लेटा मैं सुनता था प्यारी कहानी

कहानी में होता था इक नन्हा-सा गुड्डा
जिसे कहती थी तू अपना प्यारा सा मुन्ना
मुन्ने की दुनिया थी इसी गोदी-सी सुन्दर
जहाँ सोता था मैं तेरे आँचल में छिपकर

यहीं सोती थी नाजुक-सी निंदिया हमारी
माँ दिलावो वो प्यारी-सी गोदी तुम्हारी

ममता के गहने थे तेरे बढ़िया पुराने
झिलमिलाते थे जिसमें कई सपने सुहाने
सपनों में तू मुझमें ही कान्हा देखती थी
यshoदा-सी मुस्काती तू मुझे चूमती थी
अब कहाँ है माँ वो बातें पुरानी सुहानी
माँ दिलावो वो प्यारी-सी गोदी तुम्हारी

कहाँ गुम हैं वो आँचल की महकती हवायें
वो ममता की गुदडियों में खनकती दुआयें
कहाँ है वो मचलना तुझे तनिक दूर पाकर
वो खिलखिलाकर हँसना कुछ जरा-सा सुबककर

कहाँ है वो गोदी जो थी सलोनी सुहानी
वो लोरी वो थपकी वो किस्सा वो कहानी

मुझको मिली है यह कैसी काँटों की दुनियाँ
जिसमें नहीं है छलकती महकती वो खुशियाँ
माँ कहाँ हो जरा मेरे पास तो आवो ना
मुझे रोता बिखलता देखने तो आवो ना

याद आती है मुझको वो गोदी तुम्हारी
माँ दिलावो वो प्यारी-सी गोदी तुम्हारी
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One Response

  1. C.M. Sharma babucm 27/07/2017

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