मेरी भी दो बातें सुन

मेरी मंजिल मेरा रस्ता.
मुझको मोड़ने वाले सुन,
सुनता है किसकिस की बातें.
मेरी भी दो बातें सुन।

तूने दर्द की पनहाई में.
मुझको जख्म दिए तो हैं,
चींख निकलती है जख्मों से
चीखों की दो बातें सुन।

टूटी-फूटी मंजिल मेरी.
ऊबड़-खाबड़ दुनियां में,
डाल रहा है कूड़ा-करकट.
इज्जत की दो बातें सुन।

अपने जख्म की दुनिया को मैं.
किस हद तक ले जाऊँगा,
मेरी हद में ठहर गया तो.
हद की भी दो बातें सुन।

नासेह नहीं हूँ लेकिन फिर भी.
क़ाफ़िर को समझाता हूँ,
दर्द के दो-दो ढ़क्कन पीकर.
अबला की दो बातें सुन।

कमर तोड़ महँगाई में क्यों.
तोड़ रहा है डाली को,
टूट रही है नस्ल ऐ नादां.
जुड़ने की दो बातें सुन।

मेरे घर में मेरी खटिया.
तन्हा-तन्हा रहती है,
रोते हैं दो बच्चे मेरे.
बच्चों की दो बातें सुन।

कल ही कालिज में मुंसिफ़ ने.
पहनावे पर किया बबाल,
भूखी है जिस माँ की छाती.
उसकी भी दो बातें सुन।

जन्म दिया है जिस माँ ने तू.
उसकी पीड़ा भूल गया,
दशरथ-नन्दन श्रीराम ओ.
सीता की दो बातें सुन।

भारत की मर्यादा को तू.
किस हद तक ले जाएगा,
आज अयोध्या खतरे में है.
गर्दन की दो बातें सुन।

1-पनहाई/विस्तार
2-नासेह/उपदेशक

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