बहुत हो गईं खरी खरी बातें

अब प्रेम से कहता हूँ
मुझे तुमसे नफ़रत थी
नफ़रत है
और नफ़रत रहेगी,

तुम्हारी ओढ़ी हुई बुद्धिमानी
तुम्हारी बेसिर पैर की बातें
और तुम्हारा सोलो एक्ट
उन्हें भरमा सकता है
जिन्होंने तुम्हारी आँखों में खून नहीं देखा
जिन्होंने तुम्हारी खून से सने हाथ नहीं देखे
जो भूल गए हैं
तुमने निर्दोष स्टेम और उसके बच्चों को ज़िंदा जलाया था
कि जो भूल गए हैं कि तुम चुप रहे जब हजारों कत्ल हुए
की जिन्हें तुम्हारे पीछे से झांकते वे चेहरे नहीं दिख रहे
जिनकी आँखों से वहशत टपक रही है
कि जो मुझे अपने मुल्क से खदेड़ने पर आमादा हैं
जिन्हें नहीं मालूम की एक ईंट देने से मना करने पर
तुमने मेरे बच्चों को अगुवा करने की धमकी दी थी
जो भूल गए हैं की तुमने मुझे बीच शहर में
चौराहे पर इसलिए मारा था कि
मैंने खुदा का घर नेस्तनाबूद करने के लिए
तुम्हारा विरोध किया था
कि मुझे मालूम है कि
भेड़िया कभी मेमनों को नहीं बख्शता
कि मुझे मालूम है कि आज जो निजाम है
उसने मेरे मुल्क की जम्हूरियत को
जंगल बना दिया है और
उस जंगल में तुम शेर बनकर आये हो
कि मुझे मालूम है कि शेर भी मेमने को नहीं बख्शता
कि मुझे मालूम है कि ये निजाम भी
आवाम का खून चूसता है
निजाम कोई भी हो
खून चूसना उसका काम है
पर, तुम्हारी आदत में तो खून पीना है
कि मुझे मालूम है कि तुम्हारे निजाम में
तुम्हारे खिलाफ बोलने की सजा मौत है
कि मैं भयभीत हूँ कि वहशी आँखें फिर मुझे ढूंढेगी
इसीलिये मैं कहता हूँ कि
बहुत हो गईं खरी खरी बातें
अब प्रेम से कहता हूँ
मुझे तुमसे नफ़रत थी
नफ़रत है
और नफ़रत रहेगी,

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