मैंने कहा कि रो रहीं

1-
मैंने कहा कि रो रहीं
तेरी निगाहें भी,
मेंहदी लगे हाथ की
चूड़ियां खामोश।

2-
लड़कियों की अब कहाँ
पैरवी कोई,
बेलफ्ज़ हिदायत दे रहे
साधन तलाश लो?

3-
कुछ दिनों के बाद ये
लड़कियाँ बर्बाद,
होने लगेंगी हो गया सम
लिंग का अनुपात।

4-
जिन्दगी को जीतना
इतना नहीं आसां,
एक दिल जीतना
मुश्किल रहा जिसे।

5-
लागर तेरे हुस्न का
मैं बहुत लेकिन,
कुफ्र की तारीफ का
मैं न जल्वागीर।

6-
गिराकर बिजलियां
बचाया क्यों नहीं दामन,
यहाँ आशिकोँ के भी परों
संगीन होती हैं।

7-
या खुदा खुद ला रहा
इंसा तबाही को,
तब भला तबीयत मेरी हो
क्यों न खस्ताहाल?

8-
‘मुकेश’तेरी आदत कह देना
हर बात का लेकिन,
क्या वो जानते हैं जन्नत की
हकीकत का सबब?

9-
लगे तो क्यों लगे मुझको
असर कुछ उन निगाहों में,
हुआ मैं बेवफ़ा जिनको
गवांकर जिन्दगी अपनी।

10-
तकल्लुफ क्या नहीं इतना,
झुका लीं देखकर नजरें,
कहो तो बेवफ़ा कह दूँ
कहो तो चूम लूं रुख़सार।

11-
करूँ फिर क्या शिकायत
करो गर इश्क तुम मुझसे,
मेरी बेजा हरकत पर
मगर मुस्कुरा देना।

12-
न उतारो चाँद को नीचे
जो उतरा गिरेगा कहाँ यारो,
अश्क अपने संभलते नहीं हों जहाँ
होगी जन्नत दागे-निहां यारो।

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