शेर

वो सज गए फिर से पहन सेहरा भी
अब तो कोई उन्हें हमारी याद दिलाये
हम ख़ाक में मिल गए उनके एक इशारे पे
और वो कब्र पे हमारी फिर सेज है सजाये

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