धरोहर

नभ पर चमके चाँद और तारे
मन को ळगते हैः ये प्यारे ।
सुन बिटिया ये सब कुछ
भगवान से जीवों ने पाया
पाँच तत्व से बना यह मानव
कुछ भी समझ न पाया
धुआँ छोड़ती गाड़ी से
है आसमान गहराया ।
गंगा जल को मानव ने
है गंदा नल बनाया ।
एक दिवस मैं उससे(सफाई सेविका) बोली
मत पानी बर्बाद करो
आने वाली पीढ़ी का
तुम भी तो कुछ ध्यान करो ।
वह बोली छोड़ो यह सब
देख़ेंगे जब आएगा कला
मैं बोलीं सुनो मेरी भी
कल भी ज़्यादा दूर नहीं है ।
धरती को दूषित करके
हम जिंदा न रहा पाएंगे
समझो मानव अब भी सम्भळो
धरती अपनी धरोहर है
वसुधा है वसुंधरा है
इससे अपना जीवन है ।

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