करके कि तुमको कैद गर

1-॰
करके कि तुमको कैद गर
बाजुऐं अपनी,
जो जरा सी भींच लूं
तो करोगे क्या?

2-
मुझको तो देती नहीं
नींद भी दरख्वास्त,
तब भला मैं ख्वाब का
कैसे बनूं शागिर्द?

3-
मैं मुकर्रर कर रहा
दर्द की बातें,
गर छपी किताब तो
क्या पढ़ोगे तुम?

4-
रिश्ता नहीं था गैर से
लेकिन दिलों से दूर,
शायद दिलों के जाम में
कम रही शराब।

5-
वो तो पिता के नाम पे
दर्ज हैं लेकिन,
मुझको पिता के प्यार का
फर्ज भी भारी।

6-
ये तो नहीं कहते कि हम
कर कोई इलाज,
लेकिन अपनी उँगलियाँ
नब्ज से छुआ।

7-
शायद उसने कर दिया
जादू नज्र कोई,
बस्तियों से उठ रही
फिर लपट देखो।

8-
बदले नहीं मंजर अगर
महबूब का मेरे,
तब खुदा का भी कहर
कुछ कर नहीं सकता।

9-
ऐ तिलिस्मे-हुस्न कि
हर दीद से पहले,
देख ले मुझको कि या
या दिखा दे हुस्न।

10-
किस्सा तो कुछ है वर्ना
तबीयत हरी होती,
ना होने पे ये हाल
जो होती गनीमत होती।

11-
किससे कहूँ
गमे-दीवानगी का हाल,
शराबियों की तरह
ठुनकते हैं लोग।

12-
मुद्दत हुई देखे हुए
जल्वा हसीं,
उस हसीं के नाम पे
रोना आ गया।

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