लगाना आग भी अच्छा

1-
लगाना आग भी अच्छा
गर उजाला हो,
क्या पता कल रोशनी का
दीप जल जाए?

2-
वो हस्ती फ़रेबी तो नहीं
लेकिन हुआ फ़रेब,
गर्दिशों के दौर में
इंसान पर तोहमत।

3-
जा चुके घर से मेरे
जब मेरे महबूब,
आईने थे घूरते
वापिसी की राह।

4-
मांगना उनसे रहा
इश्क में मेरा,
देखकर जिसको लगें
उल्टियां हजार।

5-
इंतहा उनकी देखिए
जिनको वफ़ा से इश्क,
धन,दौलत ओ दीन पे
जिन्दगी खामोश।

6-
उठाकर नजर उसने
कहा कुछ भी नहीं लेकिन,
मुझको लगा कि हो गई
दुनियां मेरी आबाद।

7-
तुम कहो ना कहो
पर तुम्हारी याद,
कोई गजल सी गा रही
मेरे दरीचे में।

8-
देखकर उसको लगा
जैसे कि कोई जाम,
उसके बगैर जिन्दगी
बद्दुआ बदनाम।

9-
थाम करके बाजुएं जो
नाप ली मैंने कमर,
बच सकोगे फिर भला
कैसे सनम बोलो?

10-
मुस्कुराकर ले गई
दोनों दिलो-दिमाग,
एक मुश्ते-खाक का
कोई इलाज भी।

11-
कब खिला गुल कोई
हमनशीं जैसा,
चमन तो वीरान हुए
मुफ्त में बहुत।

12-
नहा के आई हो तो बैठो
सामने आकर,
दिल की रश्मे-उल्फत का
हक तो अदा हो।

lekhakmukeshsharma@gmail.com/9910198419

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