मिलना तेरा मेरा- कवि विनय भारत

देखता हूँ कि

तुम

मुझे चाहती तो हो

मानता हूँ
कहने से डरती भी हो

तुम जानती हो

शायद मैं

करता हूँ लेकिन

कहेंगे कब

हम एक दूसरे से

या

चलता रहेगा

यूँ

ही

मिलना हमारा

कब

आई ऍम

प्रतीक्षा रत

कवि विनय भारत