क्या इतिहास माफ़ करेगा

एक दिन ऐसा वक़्त
का कमाल होगा
हाथ जोड़े खड़ा
हर धनी कंगाल होगा

मिट जायेगी जिन्दंगी
एक दिन लकीरों सी
आंकी जायेगी उस दिन
दौलत असली फकीरों की

तस्वीरों को मिलेंगे
उस दिन असली आईने
कोशिशों की कीमत होगी
और क़दमों के मायने

माथे पर होगा पशीना
घबराहट से धडकता सीना
सूख रहा होगा गला
कुछ पल चाहोगे जीना

लगेगा स्थति बड़ी विकट है
अब काल तेरे निकट है
मुख से ना बोल पाओगे
आँखों में मौत प्रकट है

तेरी हर आदत का
उस दिन इन्साफ होगा
पर सोचो क्या उस दिन
इतिहास माफ़ करेगा

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