हास्य कविता- मरम्मत -कवि विनय भारत

एक पार्टी में वे बोली

यार हम लड़कियां

इतना फैशन करती हैं

फिर भी

साधारन ही दिखती
हैं

तुम लोग कुछ नही करते

फिर भी

हैंड्सम
दीखते हो

आखिर इसका

राज क्या हैं

मैंने कहा –

राज कुछ भी नही

बस

मरम्मत उन्ही सड़कों पे की जाती हैं

जिनपे गड्डे पड़ जाते हैं

कवि विनय भारत