बोश जी एक दिन आएंगे

अब तुमको यूं ना
छिपना पडेगा बोस जी
लाला लाजपत को भी
ना खोना पडेगा होश भी

भगत भूखा ना मरेगा
अब काल कोठियों में
कोई धूल ना फेंक सकेगा
अब अपनी रोटियों में

बिश्मिल को मिलेगा अब दूध
जलियाँवाला में ना मरेंगे पूत
भारतीयों से मुहँ ना फिरेगा
कोई चंद्रशेखर को ना घेरेगा

ना बिहारी निकाला जाएगा
ना पांडेय लटकाया जाएगा
ना नील उगाया जाएगा
नमक खुद बनाया जाएगा

अब अपना गगन है
अपने बाग़ बगीचे भी
आजादी भर दी तुमने
अपनी सासें खोकर भी

तुम आकर तो देखो सुभाष
आज़ाद बच्चों की बातें
उन्नत शिखर को छूता भारत
उन्मुक्त जगमगाती रातें

तुमने माँगा था खून ,
हम कतरा कतरा बहाऐगे
आ जाओ साथ बैठकर
वन्देमातरम गाएंगे

अब लाल किले पर देखो
तिरंगा अपना लहराता है
आज भारत के आगे पूरा
जहान शीश झुकाता है

क्रांतिकारियों को लेकर
बोश जी एक दिन आएंगे
हम सब मिलकर उनके
सपनो का भारत बनाएंगे

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