गुलशन आग लगाने में

नया रुआब आ गया
देखो अब जमाने में
बिना तरकश के तीर
लगते ठीक निशाने में

गोरी चमड़ी की फिदरत
थोड़ा और जगमगाने में
आज बाग़ दौड़ हो रही
दुसरे को नीचा दिखाने में

हजूर बना दस्तूर आज
मर्यादा दावं लगाने में
बदहजमी वाले लगे हैं
भूखों को आज़माने में

चमकता है चन्दन आज
निशाचरों के चेहरे पर
कमर टेढ़ी हो गई देखो
थोड़ा चूंन जुटाने में

बेशर्म सी दिखती है
फटे कपड़ों में गरीबी
अमीरी तो दिखती है
खुद ही अंग दिखाने में

जलती हैं आखें अब
खूबशुरती को देखकर
बागवान ही निकला
गुलशन आग लगाने में

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