इश्क की हर बात पे

1-‘
इश्क की हर बात पे
रोया किए कि हम,
बेवफ़ा उनको कहें
जिनसे वफ़ा किए।

2-
मत रो मयकदे में
पकड़कर जुन्नार,
मायने,मजहब
जगह देखकर बदलते।

3-
आने के इंतजार में
हुई निगाहें जाम,
मय न पीने की कसम
फिर अधूरी रह गई।

4-
लिखा गर सामने होता
हाले-तकदीर को मेरी,
क्यों न भला मैं पूछता
बेबसी का हाल?

5-
उनको मुबारक हो रहीं
रौनकें मगरूर,
औलाद पे लिक्खा नहीं
हर्फ़े-हिन्दुस्तान।

6-
बच गया चरित्र जो
उसकी क्या बिसात,
उठते हुए बाजार का
दाम दो आना।

7-
ये दुनियां है
खरीदती है क्या आखिर,
गम बिकता है
गम की दवा नहीं बिकती।

8-
मुश्किल इस शहर पाना
गली का जबाब,
लड़कियाँ,आबरु ओ
बिकता हुआ शबाब।

9-
मालूम मुझे मआल
अपनी मसर्रत का,
क्या पता कब जिन्दगी
ढेर हो जाए?

10-
गुजर-बशर तो हो रही
लेकिन नहीं साकी,
मयकदे का मेरे मजा
वो नहीं रहा।

lekhakmukeshsharma@gmail.com/9910198419

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