सफ़र-ए-ज़िंदगी

सफ़र अब ये बोझिल सा लगता है,
पर हदें अब भी बाकी है….
वैसे तो राहो से कोई गुरेज़ नहीं,
पर इक अधूरी चाह अब भी बाकी है…
शुक्रिया जो साथ दिया यारों,
मेरे वक़्त की दुश्वारियां कम करने में,
पर वक़्त से लड़ने की आग अब भी बाकी है….
आवारगी में बहुत वक़्त गुजारा है यूँ तो मैंने,
पर अब लगता है..
कुछ कर गुजरने की औकात अब भी बाकी है…….

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