शहंशाह मेरे नाम को

1-‘
ईमान पर तोहमत मेरे
मुझको कहाँ मंजूर,
शहंशाह मेरे नाम को
रक्खा फकीरों ने।

2-
कहूँ क्या मैं भला उससे
कहे जो बेवफ़ा मुझको,
छुपाकर हाथ में खन्जर
क़ाफ़िर मुस्कुराता है।

3-
बसाले मंजिल पे कोई
कारवाँ अपना,
नहीं तो तमाशा नया
देखेंगे लोग।

4-
कर वफ़ा की याद
नौजवां कोई,
फबककर रोया
ठुनककर हँसा।

5-
मक्तवे-इश्क की है
अपनी अलग दुनियां,
हुआ वही आबाद
जिसे था बर्बाद करने को।

6-
हुजूर अब तक वो खड़ी
अपने गमे-बेज़ार,
कल कहीं तूफान का
बदले नया मंजर?

7-
दुःखती हुई नब्ज कहाँ
नासूर ही कहिए,
सामने सिसकियों में
था वतन का नाम।

8-
किसने किससे क्या कहा
हुज्जत न कीजिए,
जालिम रहे मस्तियों के
दौर ही ऐसे।

9-
आबरु पे अब कहाँ
पड़ने लगा डांका,
दाम के बाजार में
भीड़ का टोटा।

10-
इबारत लिखने से
क्या होगा सोचता हूँ,
जवानी दिखी तो
लिखी इबारत।

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