इम्तिहां गर मौत है

1-‘
इम्तिहां गर मौत है
तो लगे पहरा,
मेरा खुदा के नाम हर
इम्तिहां है पास।

2-
आया नहीं शैलाब पर
हम तबाह तब भी,
क्या पता मंजर बुरा
किस तरह गुजरे?

3-
समय के तार से मैंने
जो देखा आजमां करके,
नापते हो क्या कहो
मेरी गर्दन को?

4-
भला गर हुस्न से होवे
आशिक क्यों रहे तन्हा,
मुसाफिर इश्क का होकर
गंवाया वक्त ही अपना।

5-
मेरी सच्ची कसम भी
कहाँ समझता है वो,
न हो हाथ में खन्जर
जुबां पे मंजर तबाही का।

6-
निभाते नहीं फर्ज हम
मुहब्बत का यारब,
आस्तीं उठाकर देख लो
कंधे बयां कर दें।

7-
जो आए हमसे पूछने
हाल तुम मेरा,
तो आओ बैठो,बोलो
मुस्कुराओ भी।

8-
मुस्कुराना माशुक का
कह गया जवान,
पत्नियों की बात का
कैसे यकीं कोई?

9-
जिन्दगी को मैं अगर
अपनी लगा जीने,
मंदिर,मस्जिद,मयकदे
हर जगह शराब।

10-
किसने कहा कि कुछ रख
तफ्तीशे-जहाँ के लिए,
क्या जहाँ को नहीं
जिन्दगी की तलाश?

lekhakmukeshsharma@gmail.com/9910198419

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