‘कदम बढ़े-कदम बढ़ें’

निज बढ़ रहा देश समाज आगे-आगे।
आ रहा पटरी पर राज भागे-भागे॥
माथा पकड़ बैठें ना बनकर अभागे।
शासन कैसे चलता देखे सुभागे॥
परचम रहा तिरंगा धर्म ही झंडा साजे।
नीति सुनीति दिखे देव देश दिखे जागें॥
‘मंगल’भाषी ना होवै अभिलाषी धनराषी।
शीश ना कटने देंगे स्वदेश मेरा त्यागी॥
भारत!राज साज पક્ષાघात लाज बचाएँगे।
मुस्तैदी मुट्ठी भरकर हम गगन दिखाएँगे॥

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