देश के मौजूदा हालात

खंड-खंड विश्वास हो रहा, खंड हुआ नैतिक आचार,
खंडित सोच समाज है पाले, खंडित हुए अखंड विचार ।

कोई मंदिर पर अड़ा हुआ, कोई मस्जिद खातिर खड़ा हुआ,
कोई विकृत सोच को पाले, बड़े नाज़ों से बड़ा हुआ ।

कोई दंगों की बात करे, फिर मासूमों पर घात करे,
हैवानों को कुछ नहीं होता, वो सभी दिशा में काट करें ।

राजनीति औछी बन धारा, कितनों को स्नान कराती है,
खून सभी का नीर बनाकर, नीर में खून बहाती है ।

जीत सुनिश्चित करने खातिर, हर पैतरे को अपनाते हैं,
कोई ललाट पर तिलक लगाए, कई नमाज़ को मस्जिद जाते हैं ।

क्रिकेट के लोग दीवाने इतने, हॉकी को किसने सराहा है,
सचिन जहाँ भारत रत्न है, ध्यानचंद को नहीं मिल पाया है ।

अंग्रेजी की ऐसी शक्ति कि, हिंदी कब उबर सकती है,
जिसने शब्द अंग्रेजी का बोला, अब वो ही कहलाती हस्ती है ।

दुराचार, हत्याएं अक्सर, समाचार पत्र में भरी हुईं,
नारी असुरक्षित भारत में अब, विलाप करें कहीं पडीं हुईं ।

नई-2 बीमारी और जीर्ण देह, कैसे देह इससे लड़ पाएगी,
सभी पड़े हैं शास्त्र असंगत, आयु निरंतर गिरती जाएगी ।

कन्या है जीवन की देवी, क्या पक्षपात तू करता है,
जिस दिन ये कन्या न होगी, अस्तित्व तेरा मिट सकता है ।

जीवन की यह देख के शैली, आत्मा मेरी हिल जाती है,
इन हालातों को ब्याँ करूँ मैं, फिर कलम मेरी उठ जाती है ।

अरुण कुमार जी अग्रवाल

6 Comments

  1. डॉ. रविपाल भारशंकर डॉ. रविपाल भारशंकर 18/10/2014
    • अरुण अग्रवाल अरुण जी अग्रवाल 18/10/2014
  2. जितेन्द्र जितेन्द्र 24/10/2014
    • अरुण अग्रवाल अरुण जी अग्रवाल 27/10/2014
  3. कवि अर्पित कौशिक 21/02/2015
  4. अरुण अग्रवाल अरुण जी अग्रवाल 18/03/2015

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