अनाम से बेहतर

नित्य प्रति
विक्षिप्त बिछौने
बिखरते लोग,
क्या कुछ नहीं कहते?
क्या नहीं कहते
खुला रखो हर विकल्प
जुड़ने-जुड़ाने का।
जीवित रखो
समर्पित भाव
जो सहजता प्रदान करें
बदलने को शैली
और बहते रहें
अविरल
पर्वतीय श्रंखलाओं से गिरती
धारा की तरह
ताकि मिल सके कोई नाम
अनाम से बेहतर।
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