कहाँ हो तुम -विनय भारत

आज तुमने दिल तोड़ने की बात
क्यों कर दी

मैं तो आज दिल तुम्हे ही देने बाला था

कहाँ गयी हो छोड़कर मुझे
अय हंसी

मैं तो अभी खुद ही तेज

रोने बाला था

कवि विनय भारत