मेरे देश की अशिक्षा – कवि विनय भारत

मुझे मेरे देश की

अनपढ़ता का
पता
तब चला

जब एक
रेलवे स्टेशन पर

विक्रेता से

ग्राहक द्वारा

बीडी का बंडल

माँगा गया

कवि विनय भारत