मंच सञ्चालन पर तालियों के लिए – कवि विनय भारत

दुःख सुख जिसके कभी साथ नहीं

उस जीवन में कुछ खास नही

वो महफिल भी क्या महफ़िल हैं

जिसमे खुलते कभी हाथ नहीं

कवि विनय भारत