प्रयासरत – विविधा 2013 की सम्पादकीय पंक्तियाँ

तुम संघर्ष करो भारत

युग में परिवर्तन आएगा

संकट चाहे कितने आयें

जो होगा देखा जायेगा

कवि विनय भारत