‘धरती धिक्कारती’

धरती माता हैं धिक्कारती? वह पुनि-पुनि उठ पुकारती। सभी नेक इंशानों धरा हों। धरती पुकारती है धिक्कारती है॥

बढ़ने लगा विलास वेग सा। आगे आओ !बचा लो मुझको। तुन्हें रहि-रहि कर ललकारती। धरती पुकारती है धिक्कारती है॥

जल नमक से रहती आच्छादित? हानि नहीं देती उपवन देती हूँ। नीचे जल ऊपर हिमतर रहती हूँ। धरती पुकारती है धिक्कारती है॥

विकरण को रोक तुझे जीवन देती। उत्तर-दક્ષિण विकशित अमरीका। पूरब उत्तर भारत देव सदृश महान। धरती पुकारती है धिक्कारती है॥

ग्रीकलैंड अटलांटिक पश्चिम में। मौन नाश विध्वंस घना अंधेरा। जल निधि में बन जलती रहती। धरती पुकारती है धिक्कारती है॥

शोभा, कीर्ति दीप्ति आनंद अमरता। विकल वासना में पलती रहती हूँ। क्रुद्ध सिंधु कपटी काल में रहकर। धरती पुकारती और धिक्कारती॥

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