‘ख्याल करो’

कलम बद्ध बाधौ लाले लाल।

धरती धुर आयेगा भूचाल॥

फिसल जायेगी सारी चाल।

होगा चारो चुर धमाल॥

ओर छोर चहुं ओर जो जाल।

उल्लास नृत्य का होगा ख्याल॥

संसकार संस्कृति आचरण साल।

मातु पिता गुरुजन को कर ख्याल॥

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