आदमियत का इस्तिहार

1-॰
दिल लगाने का अजब-हिज़ार हो गया है,
लोग कहते हैं हमें
प्यार हो गया है,
इस प्यार का मतलब तो
खुदा भी नहीं जानता,
कत्ल करना’आदमियत का
इश्तिहार’हो गया है।

2-
न बैठे न करे इंतजार तो
क्या करे गरीब,
दिलासा देकर गया था
अजनबी कोई,
सुबह से शाम हो गई
न लौटा वो जालिम,
न छीने निवाला तो
क्या करे गरीब?

3-
यही चाहते हो प्रभु
मैं फिरूँ दर-ब-दर,
टूटा किस्मत से न पूछा
टूटा किस कदर,
मेरे भी कुछ ख्वाब
अरमान हैं प्रभुजी
मुकाम है आखिरी
आखिरी तेरा घर।

4-
गुण्डोँ की गन का इंसाफ
तेरे इंसाफ से अच्छा है,
एक पल की तड़प का अंत
बड़ा ही सच्चा है,
तुझको चाहता रहा मैं
किसलिए बता,
क्या तेरी राह,तेरी किताब
पर चलने की है ख़ता।

5-
खेती करन को
खेत नहीं बचे अब,
आबादी में बिक रहे
खेत चहुं ओर से,
बगावत विधान से
विधाता करे नहीं,

पलायन करे अब
मुकेश मनुदेश से।

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