मेरे मुक्तक-2

मेरे मुक्तक-2

साँच को कैसी आँच ।
फिर भी होती जाँच ।
जाँच की आँच में,
छुप जाती है साँच ।
(suresh)
——–

भाईचारा चाहता हूॅ, अमन चाहता हूॅ ।
शांति, मुहब्बत वाला, वतन चाहता हूॅ।
नफरत की ना उठे, कभी कोई दीवार
मंदिर,मस्जिद,गुरूद्वारे का,मिलन चाहता हूॅ।
(suresh)
———