शराफत का जलजला

1-
शराफत का जलजला
कहर ढ़हा देता है,
पुख्ता मजबूत इमारतों को
हिला देता है,
मैं तो ढ़हा देता तुझे
तेरे जुर्म वर्षों पहले,
लोग कहते अहंकारी
अपना ही मकां ढ़हा देता है।

2-
जिंदगी इंसान का
खिलौना बन गई है,
जिसे देखो वही
दाग देता है गोली,
कोई रहस्य तो नहीं
इस युग का परिवर्तनीय,
परमात्मा ही जाने
बदल दे कब खोली।

3-
आदमी है जानवर
या कि तू शैतां,
खींचता है खाल क्यों
लाचार की शैतां,
सोच ले ये वक्त तुझे
क्या सिला देगा,
आदमी से गर बना तू
आदमी शैतां।

4-
मन की कुछेक
हरकतों से तन्हा,
बाजारू मदिरा के मोल
बिक जाती है औरत,
उठा देती है चेहरे से
सरेबज़्म पर्दा
आबरु की औरत के
किताब बिक जाती है।

5-
चिड़ियों का शोर न
कलरव है कहीं,
समन्दर में भूला हूँ
रास्ता मकां का,
क्या बतायेंगी व्हेल
मगर अरु हिलोरेँ,
दुश्मनों का अद्भुत
निवाला बना हूँ।

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