खुली किताब की तरह

1-॰
खुली किताब की तरह न खोल मुझे,
खुली हूँ तेरे सामने आईने की तरह,
मुझसे न कर बहकी-बहकी सी बातें,
तेरी हूँ न बरत गैर की तरह।
2-
चले थे करने रोशन
नजरें किसी की,
तूफान ने अधर में
घेरा हमीं को,
बुझ गया दीपक
दियसलाई बिखर गई,
बसने से पहले मेरी
दुनियां उजड़ गई।

3-
हमने सुना था
कुछ प्रेमियों को कहते,
प्यार करने वाले
जालिमों से न डरते,
डरते हैं वो
हमसफर की जुदाई से,
हवा के झोंकोँ की
बेरहम बेवफ़ाई से।

4-
मैंने वादा किया
मेरा ऐतबार करोगी,
मगर ऐ साखी
संभलकर चलोगी,
बरसात का पानी भी
कीचड़ बनाएगा,
फर्क बस कीचड़ का
जो समझ जाएगा।

5-
इंतजार लिखा है
तकदीर में तेरी,
तदवीर खुद
हैरान है तेरी,
तस्वीर तू उसकी
दिल में समा ले,
तसव्वुर की भोर में
किस बात की देरी?

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