जश्न्न-ए-ईद

जश्न्न-ए-ईद और मेरा चाँद उदास है
शिकायत स्कूल से है स्कूल से नाराज़ है
आस लगा बैठा था छुट्टी में नानी घर जायेगा
क्या पता था इक छुट्टी से आस पे पानी फिर जायेगा
समझाया तो है मेरे चाँद तू ईद का का चाँद है
तू एक तारीख को दिखता है तो छुट्टी भी एक है
सब्र रख की छुट्टियों की बहार आने वाली है
जी भर के नानी के घर रहना दिवाली आने वाली है
यह चाँद चोदह: दिन के अमावस के बाद होता है
इस लिए छुट्टियाँ भी बे-हिसाब देता है ….

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