बहुत खो न दें आज

कल कुछ पाने के लिए
बहुत खो न दें आज

राह सुनहरी बढ़ रही है
मंजिलें भी मिल रही हैं
पर न भूलें झूठ अपना
पर न भूलें सांच
कल कुछ पाने के लिए
बहुत खो न दें आज
क्या गलत है
दिल से पूछें क्या सही
गांठ बांधे
बात कितनी भले कड़वी सही
है ज़रूरी हम ये समझें
किस पर जताएं नेह अपना
किस पर करें विश्वास
कल कुछ पाने के लिए
बहुत खो न दें आज
तुम जानते हो दर्द मेरा
बिन तुम्हारे कौन मेरा
खोकर मिले
फिर धडकनों की
क्यों भूले आवाज़
कल कुछ पाने के लिए
बहुत खो न दें आज

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